लक्ष्मी चंद अग्रवाल
फ़ोन 91-9311008400
ईमेल nvmrohini@gmail.com
हे मधुसूदन हे नाथ
हे मधुसूदन हे नाथ, धरा पे आ जाओ,
हे मधुसूदन हे नाथ, धरा पे आ जाओ,
लिये चक्र सुदर्शन हाथ, धरा पे आ जाओ,
हे मधुसूदन हे नाथ,
कौरव शक्ति बढ़ी चढ़ी है, पांडव जन की कठिन घडी है,
कैसे जीयें द्रुपद सुता अब, आज लाज संकट में पड़ी है
दुष्ट दुशासन और कीचक करें, नित नित अत्याचार
धरा पे आ जाओ,
लिये चक्र सुदर्शन हाथ, धरा पे आ जाओ,
हे मधुसूदन हे नाथ
जब जब पाप बढे धरती पे, पापियों का संहार करूँगा
संत जनो की रक्षा के लिये युग युग में, मैं शरीर धरुंगा
याद करो हे जनार्दन गीता में लिखा है इकरार
धरा पे आ जाओ
लिये चक्र सुदर्शन हाथ, धरा पे आ जाओ,
हे मधुसूदन हे नाथ
कंस सरीखा पापी राजा, दुखियारा है
सकल समाजा,
शोषण उत्पीडन को सहते, नित नित जीते नित नित मरते,
सोया पुरुषार्थ आन जगा जा,
धरा पे आ जाओ,
हम तुम्हें झुकाते माथ,
धरा पे आ जाओ,
अब धरो शीश पर हाथ,
धरा पे आ जाओ,
लिये चक्र सुदर्शन हाथ,
धरा पे आ जाओ,
हे मधुसूदन हे नाथ
धरा पे आ जाओ,
thou
thou dks rks ml us gh ft;k]
ftl us viuh 'krks± ij ft;k]
Hkh[k ekaxdj thou dh]
thou dks ft;k rks fQj D;k
ft;k]
vku cku 'kku ls] /keZ vkSj
bZeku ls]
vius LokfHkeku ls]
FkksM+k Hkh ft;k rks cgqr
ft;k]
ftruk Hkh ft;k og cgqr ft;kA
अभी तो मैं जवान हूँ
अभी तो मैं
जवान हूँ, अभी तो मैं
जवान हूँ,
हवा भी खुश
गवार हैं, अभी तो मैं
जवान हूँ,
अभी तो मैं
जवान हूँ,
दिल जवां दिमाग जवां, आत्मा जवान है,
मेरी आंखों में बसा, प्यार का जहान
है,
कुछ लोग मुझको देखते- देखते और घूरते,
मुझे बात समझ आती है ना,
समझना नादान हूं,
अभी तो मैं
जवान हूँ, अभी तो मैं
जवान हूँ,
अपनों की नजर
में मैं जमीं हूं आसमान हूं,
एक बसंती
हवा हूँ और कोयल
का गान हूं,
धड़कते दिलों के लिये,
दवा की दुकान हूं,
अभी तो मैं
जवान हूँ, अभी तो मैं
जवान हूँ,
जिसने बनाया है मुझे,
उसका बड़ा अहसान है,
मेरे दिल में वही रहता है, दिल
उस का ही मकान
है,
दुनिया बनाने वाले तेरी शान पे कुरबान
हूं,
हिम्मत जो तूने
दी है, उसी से मैं
जवान हूं
अभी तो मैं
जवान हूँ, अभी तो मैं
जवान हूँ,
असली
- नकली
ऊपर
से सब श्लील है, भीतर
से नहीं श्लील,
ई मनवा चंचल है मुआ,
सब करते हैं फील,
सब
करते हैं फील, सीमाएं खो जाती
हैं,
श्लील
रहे आवरण, बात सब हो
जाती हैं,
कथनी
करनी का फर्क व्यापक है चहुं
ओर,
सैंम्पल
में कुछ और है,
पैकिंग में कुछ और,
चला
सदा से आ रहा
असल-नकल का भेद,
पर
पैकिंग खुलने पर दिखें,
कहां माल में छेद,
टूट
गई जो सील, उन्हें चिन्ता नहीं भारी,
नकली
सील लगा लेते ऐेसे व्यापारी,
महज़
दिखावा और धोखा हैं दुनिया सारी,
रहे
अगर गफलत में तो होगी
दुश्वारी,
देनी
चाहे पड़े तुम्हे कीमत कुछ भारी,
लेना
ब्रांडेड माल मोहर जिस पर सरकारी,
मुझको
है विश्वास याद रहे बात हमारी,
तुम
लोगे ब्रांडेड माल मोहर जिस पर सरकारी,
मैंने
तो है दुनियादारी की बात
बताई,
किसी
धोखे में न कर
देना मेरी रूसवाई,
किसी
धोखे में न कर
देना मेरी रूसवाई।
No comments:
Post a Comment