Tuesday, July 29, 2014





लक्ष्मी चंद अग्रवाल 

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हे मधुसूदन हे नाथ
हे मधुसूदन हे नाथ, धरा पे आ जाओ,
हे मधुसूदन हे नाथ, धरा पे आ जाओ,
लिये चक्र सुदर्शन हाथ, धरा पे आ जाओ,
हे मधुसूदन हे नाथ,
कौरव शक्ति बढ़ी चढ़ी है, पांडव जन की कठिन घडी है,
कैसे जीयें द्रुपद सुता अब, आज लाज संकट में पड़ी है
दुष्ट दुशासन और कीचक करें, नित नित अत्याचार
धरा पे आ जाओ,
लिये चक्र सुदर्शन हाथ, धरा पे आ जाओ,
हे मधुसूदन हे नाथ
जब जब पाप बढे धरती पे, पापियों का संहार करूँगा
संत जनो की रक्षा के लिये युग युग में, मैं शरीर धरुंगा
याद करो हे जनार्दन गीता में लिखा है इकरार
धरा पे आ जाओ
लिये चक्र सुदर्शन हाथ, धरा पे आ जाओ,
हे मधुसूदन हे नाथ
कंस सरीखा पापी राजा, दुखियारा है  सकल समाजा,
शोषण उत्पीडन को सहते, नित नित जीते नित नित मरते,
सोया पुरुषार्थ आन जगा जा,
धरा पे आ जाओ,
हम तुम्हें झुकाते माथ,
धरा पे आ जाओ,
अब धरो शीश पर हाथ,
धरा पे आ जाओ,
लिये चक्र सुदर्शन हाथ,
धरा पे आ जाओ,
हे मधुसूदन हे नाथ
धरा पे आ जाओ,



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अभी तो मैं जवान हूँ
अभी तो मैं जवान हूँ, अभी तो मैं जवान हूँ,
हवा भी खुश गवार हैं, अभी तो मैं जवान हूँ,
अभी तो मैं जवान हूँ,
दिल जवां दिमाग जवां, आत्मा जवान है,
मेरी आंखों में बसा, प्यार का जहान है,
कुछ लोग मुझको देखते- देखते और घूरते,
मुझे बात समझ आती है ना, समझना नादान हूं,
अभी तो मैं जवान हूँ, अभी तो मैं जवान हूँ,
अपनों की नजर में मैं जमीं हूं आसमान हूं,
एक बसंती हवा हूँ और कोयल का गान हूं,
धड़कते दिलों के लिये, दवा की दुकान हूं,
अभी तो मैं जवान हूँ, अभी तो मैं जवान हूँ,
जिसने बनाया है मुझे, उसका बड़ा अहसान है,
मेरे दिल में वही रहता है, दिल उस का ही मकान है,
दुनिया बनाने वाले तेरी शान पे कुरबान हूं,
हिम्मत जो तूने दी है, उसी से मैं जवान हूं
अभी तो मैं जवान हूँ, अभी तो मैं जवान हूँ,



असली - नकली
ऊपर से सब श्लील है, भीतर से नहीं श्लील,
मनवा चंचल है मुआ, सब करते हैं फील,
सब करते हैं फील, सीमाएं खो जाती हैं,
श्लील रहे आवरण, बात सब हो जाती हैं,
कथनी करनी का फर्क व्यापक है चहुं ओर,
सैंम्पल में कुछ और है, पैकिंग में कुछ और,
चला सदा से रहा असल-नकल का भेद,
पर पैकिंग खुलने पर दिखें, कहां माल में छेद,
टूट गई जो सील, उन्हें चिन्ता नहीं भारी,
नकली सील लगा लेते ऐेसे व्यापारी,
महज़ दिखावा और धोखा हैं दुनिया सारी,
रहे अगर गफलत में तो होगी दुश्वारी,
देनी चाहे पड़े तुम्हे कीमत कुछ भारी,
लेना ब्रांडेड माल मोहर जिस पर सरकारी,
मुझको है विश्वास याद रहे बात हमारी,
तुम लोगे ब्रांडेड माल मोहर जिस पर सरकारी,
मैंने तो है दुनियादारी की बात बताई,
किसी धोखे में कर देना मेरी रूसवाई,
किसी धोखे में कर देना मेरी रूसवाई।


अहंकार

कोई-कोई यह कहता है, मेरा कोई क्या कर लेगा,

इन शब्दों में हैं अहंकार मेरा कोई क्या कर लेगा,

हे सम्पन्न घराना भी शिक्षा भी ऊँची पाई है,

पर अहंकार उनके मन में लेता रहता अंगडाई हैं,

समय बदलता रहता है, एक दिन ऐसा भी आता है,

रहे आशावान समाज यदि, वह दिन जल्दी जाता है,

वह अलग नहीं रह पाता है और धारा में मिल जाता है,

प्यारा है निज सम्मान जिसे विद्रोही नहीं कहाता है,

वह सब के साथ चले मिलकर निकुल का मान बढ़ाता है,

जो मूल्य जानता सेहत का कड़वी औषध पी जाता है,

पीने में कड़वी लगे बहुत, आनन्द बाद में पाता है,

जो मूल्य जानता सेहत का कड़वी औषध पी जाता है।


सांवरिया जाओ
मेरे दिल से उठी है पुकार सांवरिया जाओ,
जाओ जाओ,
जाओ हे कृष्ण मुरार-सांवरिया जाओ,
मधुबन में मुरझाई कली है, सूनी सूनी कुंज गली है,
गऊऐं रही पुकार सांवरिया जाओ, जाओ जाओ,
जाओ हे कृष्ण मुरार-सांवरिया जाओ,
मन मन्दिर को हमने सजाया,
तेरे चरणों में है ध्यान लगाया, खोल रखे हैं मन के द्वार-
सांवरिया जाओ, जाओ जाओ,
जाओ हे कृष्ण मुरार-सांवरिया जाओ,
तूने सुदामा गले लगाया, राजा रंक का भेद मिटाया,
बालेपन का निभाया प्यार सांवरिया जाओ,
जाओ जाओ, जाओ हे कृष्ण मुरार-
सांवरिया जाओ,
नरसी का तूने भात भरा था, द्रोपदी का दुःख दूर किया था,
आज आई हमारी बार सांवरिया जाओ,
जाओ जाओ, जाओ हे कृष्ण मुरार-
सांवरिया जाओ,
क्या शेष नाग पर तुम सोये हो, या बन्सी की धुन में खोये हो,
क्या सुनती नहीं पुकार
सांवरिया जाओ,
जाओ जाओ, जाओ हे कृष्ण मुरार-
सांवरिया जाओ,
पाप मिटाऊं धर्म बढ़ाऊं संतजनों के कष्ट मिटाऊं,
युग युग में धरती पर आऊं, गीता में किया था इकरार-
सांवरिया जाओ, जाओ जाओ,
जाओ हे कृष्ण मुरार-सांवरिया जाओ,
एक दिन तुम तो रास मग्न थे, अश्रुपूर्ण मेरे नयन थे,
मैंने तुमको लिया था पुकार
सांवरिया जाओ,
जाओ जाओ, जाओ हे कृष्ण मुरार-
सांवरिया जाओ,
पांव हमारे डगमग डगमग भक्ति का हैं बड़ा दुर्गभ,
गिर जायें निर्बल हैं हम, घबराता है ये मन
के बांह पकड़ के संभार,
सांवरिया जाओ,
जाओ जाओ, जाओ हे कृष्ण मुरार
सांवरिया जाओ,